शनिवार, 27 नवंबर 2010

CHCHLAVA

भाषा  का  गहन  अर्थ  समझे  बिना  अभिव्यक्ति  मात्र  छलावा  हो  सकती  है .

शिक्षा  और  ज्ञान  में  अंतर  समझे  बिना  शिक्षा  मात्र  झूठा  दिलासा  हो  सकती  है .

दूसरों  के  सुखों  पर  दुखी  होने  और  दूसरों  के  दुखों  पर  सुखी  होने  से  मनुष्यता  मात्र  छलावा  हो  सकती  है  .

बिना  लक्ष्य  ज़िन्दगी  बसर  करने  से  ज़िन्दगी  मात्र  छलावा  हो  सकती  है  .

दूसरों  में  कमियां  और  स्वयं  में  सम्पूर्णता  ढूँढने  से  प्रगति  मात्र  छलावा  हो  सकती  है .

केवल  धन  के  पीछे भागते  रहने  से  खुशियाँ  मात्र  छलावा  हो  सकती  हैं .

दूसरों  को  दुःख  देकर  चैन  से  सोने  से  नींद  मात्र  छलावा  हो  सकती  है .

अदृश्य  से  प्रेम  और  प्रत्यक्ष  का अनादर  करने  से  ईश्वर की भक्ति  मात्र  छलावा  हो  सकती  है .



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