रविवार, 12 दिसंबर 2010

DDA HOUSING SCHEME : FAYDA DDA KA YA JANTA KA ?

DDA   ने 2008 की  आवासीय योजना में400000 लोगों से लगभग ६००० करोड़ रूपये बतौर  पंजीकरण राशि  वसूले . ३ महीनों तक पैसा अपने अकाउंट में रखकर करोड़ों रुपये ब्याज के रूप में बिना कुछ लिए दिए प्राप्त किये . इस काम में अगर  किसी का फायदा हुआ तो वो थे- DDA और विभिन्न सरकारी- गैर सरकारी बैंक .दोनों ने मिलकर जमकर चाँदी काटी.
यहाँ गौर करने लायक बात यह है कि जिस देश  में  एक गरीब इंसान  लाख रुपये में अपना घर खरीदने का सपना देखने की हिम्मत भी बमुश्किल ही जुटा पाता है . उस देश की राजधानी में FLATS की न्यूनतम कीमत भी ३-५ लाख रु. रखी जाती है . और हद तो तब हो जाती है जब HIG और जनता FLATS के आवेदन के लिए एक समान पंजीकरण राशि वसूली  जाती है. 150000 रु.  यह एक  आम आदमी और उसकी गरीबी का  मज़ाक नहीं तो और क्या है ? ऐसा लगता है जैसे DDA पंजीकरण नहीं FLATS का बयाना ले रहा हो . ऐसा लगता है जैसे समाज के कमज़ोर वर्गों के प्रति DDA  का  व्यवहार सौतेला  हो गया है . कितने दुःख  की बात है कि आम किसानों कि ज़मीनों को विकास के नाम पर कौड़ियों के दाम पर  अधिग्रहित कर लिया जाता है . और बाद में सोने के भाव बेच दिया जाता है .जिसकी ज़मीन थी ,वो किसी इमारत का चौकीदार बनकर रह जाता है .DDA की जिम्मेदारी है कि वह उचित कीमत पर समाज के प्रत्येक वर्ग को आवास मुहैया करवाए .और DDA क्या कर रहा है ये हम सभी जानते हैं .  DDA मुनाफाखोरी  के रास्ते पर चलते हुए अपने उद्देश्यों से भटक गया है .इसका ताज़ा उदाहरण DDA की आवासीय योजना- 2010 में देखा जा सकता है .कहने को तो DDA ने इस बार पंजीकरण राशि  कुछ मामलों में ५०००० रु. भी रखी है . पर ये FLATS   नाममात्र ही है . जबकि न्यायसंगत यह  होता कि एक कमरे वाले सभी आवासों की पंजीकरण राशि 50000 रु. रखी जाती. अब भला DDA ऐसा क्यों करने लगा उसे तो अपने ब्याज से मतलब है. आप कहीं से भी इंतजाम कीजिए उसे इस बात से कोई सरोकार नहीं . 
आप इतनी बड़ी राशि बैंक से लोन लेंगें तो बैंक का फायदा ,DDA के पास  तीन महीने तक पैसा रहेगा तो उसका भी फायदा ही  होगा . अब आप हिसाब लगाकर खुद ही देख लीजिए कि लगभग 15000 FLATS की
पंजीकरण  राशि को जमा हुए FORMS की संख्या से गुणा  करके देख लीजिए. उसके बाद उस जमा राशि पर ३ महीनों में मिलने वाले साधारण ब्याज की गणना कीजिए .आप जान पाएंगे कि यह ब्याज लाखों में नहीं, करोड़ों में है . वास्तव में होना यह चाहिए  कि HIG FLATS से ऊपर के सभी FLATS की पंजीकरण राशि १५०००० रु. और उससे निम्न श्रेणी  के FLATS  की २००००रु. तक ही रखी जाए तो आम  जनता के लिए यह  काफी  राहत की बात होगी. वैसे भी यह राशि मात्र DRAW  में शामिल होने के लिए ही तो है. और DRAW  में शामिल करने के लिए इतनी बड़ी राशि लेने का कारण   मेरे गले तो नहीं उतरता .बाकि जो DRAW में सफल होगा वो तो पूरी कीमत का भुगतान करेगा ही .फिर बिना वजह केवल आवेदन  के रूप में इतनी बड़ी राशि लेने के औचित्य पर DDA और आवास मुहैया करवाने वाली अन्य  राजकीय  संस्थाओं को पुनर्विचार करना चाहिए. जिससे कि आम जनता के हितों की अनदेखी न हो और प्रशासन में जनता 
की आस्था कायम रहे . 



3 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

इस नए और सुंदर से चिट्ठे के साथ आपका हिंदी ब्‍लॉग जगत में स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

क्रिएटिव मंच-Creative Manch ने कहा…

नववर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएँ.


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vedika kaushik ने कहा…

suendra sir main vedika-8th s.d
pls 1 baar mera blog dekho maine apne frnd ke kehne par new year par poem likhi hai jo mere frnds ne niche society function me gaayi thi.

vedikakaushik.blogspot.com